आँखो के समंदर की मछलियां
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●उस लड़की की आँखों में मुझे एक गहरा समंदर दिखाई दिया करता था। मैं कई बार उन तमाम आशिकों की तरह उस समंदर में डूब जाना चाहता था। पर मुझे अब लगता है कि डूब जाना चाहिए था ।
उस समंदर में कुछ मछलियां भी मैंने देखी। रँगबिरँगी.... प्यारी सी चंचल । उनमें से कुछ मछलियां
उस समंदर से बाहर निकलना चाहती थी।
पर बाहर निकलना तो मना है।
मर जायेंगी ना ।
एक बार मेरे कांधे पर सर रखकर वह फफक पड़ी।
- मुझे डॉक्टर बनना है।
मैंने कहा ...
- मुझे तुम्हे डॉक्टर बनाना है।
वह खुश हो गई और उसने मेरे गालों को चूमकर लाल कर दिया।
बाद में मैंने इस बारे में सोचा तो मुझे काले बादल के परे आफ़ताब नज़र आया। मैंने अपने जेब में पड़े बीस रुपये की पुरानी टेप लगी नोट को निकाल कर देखा। फिर अपने जूते के फीते कस कर बाँधे और मूंगफली खाने लगा।
मोहल्ले में एक लड़का था। उसका फ़्यूज उड़ा हुआ था पर वह पागल नही था। बचपन में वह किसी से बात नही करता था। चुप रहता... लोग उसे गालियाँ देते, मारते पीटते। पर इससे उसे कुछ फर्क नही पड़ता था। उसने चुप रहने का कारोबार जारी रखा हुआ था।
जब वह लड़का छोटा था, तब मैं भी छोटा था। मेरे बाल बड़े होते थे। मेरी आँखों के नीचे काले घेरे भी नही थे। मुझे भारत - पाकिस्तान का मैच टीवी पर देखना पसन्द आता था। मेरे साथ के सारे बच्चे बड़े होकर क्रिकेटर बनना चाहते थे। पर उनमें कोई भी लड़का हाथ घुमा कर गेंद नही डाल पाता था। पर उन सभी को भारत - पाकिस्तान का क्रिकेट मैच देखना पसन्द था।एक रविवार भारत और पाकिस्तान का मैच टीवी पर आना था। वह कम बोलने वाला लड़का अपने घर के बाहर बैठा हुआ था। उसे देखकर ऐसा लगता था कि जैसे उसने समाधी ले ली हो।
मेरे साथ मेरा एक दोस्त था। उसने उससे पूछा कि- बता आज कौन जीतेगा...
भारत या पाकिस्तान .... ?
वह लड़का कभी बोलता नही था, ना ही बात करता था। उस दिन उसने अपने पैर के नाखूनों की तरफ देखते हुए जवाब दिया।
- पाकिस्तान ....
उसके बोलते ही हम दोनों मित्रो ने मन में कुछ डिसाइड कर लिया था। वह यह था कि आज इस चूतिये का मुँह बन्द करा कर रहेंगे ....जो कभी खुलता ही नही था।
मेरे दोस्त ने उस लड़के की कॉलर पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा। मैंने उस लड़के के चेहरे पर दनादन कई मुक्के बरसा दिए। उसे दर्द हो रहा था पर वह ना चीख रहा था , ना चिल्ला रहा था। वह चुप था...
और उसकी चुप्पी हमारे गुस्से में और अधिक इज़ाफ़ा कर रही थी। हम उसे चिल्लाते, तड़पते हुए देखना चाहते थे।
हमने तय किया कि जब तक ये चिल्लाकर नही रोता तब तक इसको मारेंगे।
मेरा दोस्त उस लड़के को जमीन पर लिटाकर लाते बरसा रहा था।
हम थक चुके थे.... हार भी।
आदर्श मार मारने की सन्तुष्टि प्राप्त ना कर पाने से हम और अधिक आक्रामक हो उठे थे। मुझे उसकी तड़प और वेदना की अंतिम सीमा का नज़ारा देखने का मन था। पर वह घोंचू मार खाते हुए भी चुप था।
इसी बीच मैंने उसे जमीन पर से उठाया। कॉलर पकड़ते हुए बिजली के खंभे तक ले गया। उसको आगाह किया कि साले... चिल्ला नही तो जान ले लेंगे।
उसे कुछ समझ नही आया।अगले ही क्षण उस बिजली के खम्भे पर खून का लाल धब्बा नज़र आ रहा था। वह लड़का जमीन पर गिरा पड़ा हुआ था। उसकी आँखे नही खुल रही थी।
खून देख कर हम दोनों लड़कों की साँसे तेज हो गई। उसे वहीं छोड़कर हम भाग लिए।
रात में मैच का परिणाम निकला... और पाकिस्तान जीत गया। मुझे उस लड़के पर बहुत गुस्सा आ रहा था।
मैंने तय किया कि उसका सर कल फिर खंभे पर दे मारूँगा।
मुझे यकीन था ... मेरा दोस्त भी यही सोच रहा होगा।
समंदर जैसी आँखों वाली लड़की। मुझसे बेहद प्यार करती थी।
मैं अब कालेज में था और वो बारहवीं में।
उसे डॉक्टर बनना था।
और मेरी काम इच्छा चरम पर थी।
वह लड़की मुझसे बेहद मोहब्बत किया करती थी। मेरी हर बात पर उसे भरोसा होता और मेरी हर बात मानती थी। क्योंकि उसे मानना होता था। वह डरती थी मुझसे। मेरा गुस्सा बहुत बेकार था। मुझे याद है एक बार उसने मुझे आप की जगह तुम कह दिया था।
अगले ही पल उसकी गाल पर मेरी उँगलियों के निशान साफ़ दिखाई दे रहे थे।मैं उससे अधिक समझदार था ऐसा उसे विश्वास था। उसके बारहवीं में 92 % आ गए थे। उसने जब मुझे यह बताया तब मुझे जलन हुई। मैंने उससे कहा ये स्कूल तक तो सब ऐसे ही है। अब नीट क्वालीफाई कर के दिखा तब कोई बात है। मैंने बारहवीं द्वितीय श्रेणी में पास की थी। यह बात उस लड़की को पता थी। पर वह कभी कुछ नही कहती थी।
डरती थी।
दिसबंर की कड़ाके की ठंड थी। मेरा दोस्त
( जिसके साथ मिलकर मैंने उस कम बोलने वाले लड़के को मारा था )
उसका परिवार एक शादी में गया था। घर में सिर्फ वही अकेला था । वह ऐसा लड़का था जिसे लोगों के प्रेम सम्बन्धो के बारे में जानने की बड़ी चुल्ल रहा करती थी।
वह सभी प्रेमी युगलों की हर सम्भव मदद किया करता था। कोई भी लड़की उसकी दोस्त नही थी। पर दोस्तों की दोस्तों से उसे थोड़ी भी बात करने को मिल जाती तो उसे वह अपनी ख़ुशनसीबी समझता था।
उसे लड़के - लड़कियों की कॉल रिकॉर्डिंग सुनने का भी बड़ा शौक था।
उस दिन उसका घर खाली था। उस कड़ाके की ठंड में सूरज के दर्शन कई हफ़्तों से नही हुए थे।
मुझे बचपन में कॉमिक्स पढ़ने का बड़ा शौक था। मेरा पसंदीदा कॉमिक कैरेक्टर बिल्लू हुआ करता था। उसकी एक गर्लफ्रेंड हुआ करती थी जिसका नाम ज़ोजी था। मुझे ज़ोजी हमेशा से पसन्द आती थी। जब मैं छोटा था तब बहुत सी बातें समझ नही आया करती थी। जब बड़ा होने लगा तब मुझे ज़ोजी से प्यार होने लगा। मैं उसके साथ वो सब करना चाहता था। जो मैंने अपनी आठवीं कक्षा की विज्ञान की किताब के एक "चैप्टर विशेष" में पढ़ा था।
मुझे लगता था कि बिल्लू वो सब करता होगा जो मैं करना चाहता हूँ। मैंने अपने मन में कई बार ज़ोजी की शारीरिक संरचना की कल्पना की थी। उस जैसा कोई नही था। पर मुझे ज़ोजी चाहिए थी।
मुझे वह लड़की मिल गई थी। उसे मैं प्यार से ज़ोजी बुलाया करता था। उसे भी अच्छा लगता था।
पर वह हसरत अब तक अधूरी ही रह गई। आज मौका अच्छा था। मैंने अपनी ज़ोजी को नीट के प्रिपरेशन के बहाने से अपने दोस्त के घर बुला लिया। उसने ब्लू जींस और ब्लैक टॉप पहना हुआ था । उसने थोड़ा मेकअप भी किया हुआ था। उसके बाल बिखरे हुए थे। जो इस बात का साफ इशारा कर रहे थे कि वह आज नहा कर नही आई है। उसकी नाक भी बह रही थी। वह बार बार रूमाल से अपनी नाक साफ करती और जोर से खांसती।
मुझे इन सब बातों से कोई खास फर्क नही पड़ रहा था। मैंने उसे बेडरूम में जाकर बैठने के लिए कहा।
उसके अंदर जाते ही मैंने दोस्त के मेन गेट को अंदर से लॉक कर दिया। चारो ओर नज़रें दौड़ाने के बाद चुपचाप अंदर आ गया।
उसने अपने काँधे पर टंगे बैग को उतारा और उसमे से किताबें निकालने लगी।
वह बेवक़ूफ़ थी... बेहद लापरवाह।
एक बार मेरे साथ एक रेस्त्रां में पिज्जा खाने गई थी। हम दोनों जब खा पीकर बाहर निकले तो मैं गाड़ी लेने पार्किंग की तरफ चला गया।
एक बूढ़ी भिखारिन उसके पास पहुंची। उसकी गोद में एक छोटा बच्चा था। उस बूढ़ी औरत ने उससे कहा कि यह उसका नाती 3 दिन से भूखा है। उसके खाने के लिए कुछ पैसे दे दो।
उसने अपना पर्स खोला। उसमे सौ - सौ के पांच नोट थे। उसने वे सारे नोट उस भिखारिन को दे दिए।
मैं जब बाइक लेकर वापस आया तो वह काफी चहक रही थी। मैंने पूछा अचानक से क्या हुआ ?
तो उसने भिखारिन वाली बात बताई।
मुझे ऐसा पब्लिक प्लेस में ऐसा नही करना चाहिए था। पर गुस्सा मुझे बहुत आता था। उसकी गाल पर मारा गया वह थप्पड़ आज भी याद है। वो गाल पर हाथ रखे सर नीचा किये रो रही थी, और मैं उस पर चिल्ला रहा था।
बेवक़ूफ़ थी पूरी ...
किताबें निकाल कर उसने क्वेशचन्स पर टिक करना शुरू कर दिया। मैं उससे सटकर बैठ गया। मेरे हाथ में दोस्त का लैपटॉप था।
मुझे फिल्में देखना बड़ा पसन्द आता था। सिर्फ और सिर्फ हॉलीवुड फिल्में। उसमे सब होता था। एक्शन से लेकर किसिंग सीन्स का पूरा मसाला उसमे मिल जाता था। कुछ फिल्म्स में तो कक्षा आठवीं के "चैप्टर विशेष" के टॉपिक का "प्रैक्टिकल दर्शन" का सुख भी मिल जाता था।
मैंने लैपटॉप ओपन किया। मैंने उसे कहा कि आज मूवी देखते है। मुझे याद ही नही कि इस बात पर उसकी क्या प्रतिक्रिया रही होगी। वह बोलती भी कम थी डरती ज्यादा थी।
फिल्म शुरू हो गई। उस फिल्म में एक लड़का और एक लड़की बस थे। कुछ समय बाद उन दोनों के जिस्म से कपड़े नदारद हो गए। उस लड़की ने आँख बंद कर ली।
मैंने उससे कहा कि तेरी आँखों के समंदर की मछलियां इसी के लिए बाहर आना चाहती है। उन्हें बाहर आ जाने दे।
उसने आँखे नही खोली।
मैंने उसके माथे के बीच में दाँये हाथ की ऊँगली रखी। धीरे - धीरे ऊँगली नीचे आने लगी। नाक, होठ, ठुड्डी, गला और छाती।
यहाँ पर ऊँगली रुक गई और हाथ ने पँजा फैला लिया। उसकी छाती को अपने पँजे की गिरफ्त में लेते ही उसने अपनी आँखे और जोर से बन्द कर ली और उसके मुँह से .."आह" की आवाज़ निकली।
मेरी कलाई को उन बन्द आँखों के कोरों से टपकती हुई पानी की बूंदों का एहसास मिला। हमेशा कि तरह मैंने उस चीज को इग्नोर किया। इग्नोर कर देना मेरी आदत थी। पढ़ाई के समय पढ़ाई को इग्नोर, खेलते समय खेल को इग्नोर, प्रेमिका की भावनाओं को इग्नोर, घर वालों के सपनों को इग्नोर ....
पता नही कितना इग्नोर मैंने अपने जीवन में किया था। मेरे दोस्त मुझे स्वार्थी बुलाते थे, पर इस बात पर मुझे गर्व हुआ करता था।तभी खिड़की से कुछ आवाज़ आई। खिड़की के उस पार मेरा दोस्त खड़ा हुआ था। जो हम दोनों को देख रहा था।
यह बात मुझे मालूम थी पर जब उस लड़की ने उसे देखा तो वह उठकर जाने लगी। मैंने उसे कसकर अपनी बाहों में ले लिया था। उसे डराने के लिए बराबर उस पर चिल्ला रहा था। मेरा हाथ उसकी जींस की बटन को खोलने में व्यस्त था। वह रो रही थी... और नही .. नही कर रही थी।
मेरे सर पर अलग सुरूर था। जैसे पूरी जॉनी वाकर की बोतल गटक कर आया हूँ। जो मैं कर रहा था उसे उचित शब्दों में जबरदस्ती कहते हैं। पर वो लड़की मुझसे डरती थी और प्यार भी करती थी। ये सब करना मेरा हक था।
और वह मुझे मिलना चाहिए था।
मेरा दोस्त खिड़की के बाहर से उन दृश्यों को देख कर आनन्दित हो रहा था। हॉलीवुड फिल्में देखने का शौक उसे भी बहुत था।
इसी बीच उसका ब्लैक टॉप फट गया। उसके बिखरे बालों को मेरे हाथों की उँगलियों ने अपनी गिरफ़्त में ले लिया था।
अचानक उस लड़की ने मेरी कलाई पर जिस पर कुछ देर पहले उसके आँसू टपके थे ... अपने दाँत गड़ा दिए।
मैं दर्द से बिलबिला भी नही पाया था और उसने एक जोर का थप्पड़ मेरे गाल पर लगाया।
ये वही गाल था जिसे... उसने चूम कर उसने कई बार लाल किया था।
उसने दौड़ लगाई।
मैं उसके पीछे भागा।
कमरे का गेट खोलकर वह मेन गेट तक जाना चाहती थी।
काश चली जाती।
मैंने उसके बिखरे बालों को फिर से पकड़ा। उसका पैर सीढ़ियों पर से लड़खड़ाया। उसके बालों पर से मेरी गिरफ्त छूट गई।
मेन गेट पर उसका माथा जाकर टकरा गया।
गेट का एक नुकीला हिस्सा उसकी दाईं आँख में घुस चुका था।
वह गला फाड़ कर जोर से चिल्लाई। दर्द की वह चरम सीमा थी। मेरी ख्वाहिश बचपन से ही इस तरह के दृश्य देखने की थी। उस कम बोलने वाले लड़के ने मुझे तब निराश किया, जब उसका सिर मैंने बिजली के खम्भे पर दे मारा था। पर आज...
उस लड़की को हो रहे दर्द और उसकी वह तड़पती हुई चीख ... जिसकी कोई इन्तेहा नही थी। उसका एहसास ... उस दर्द का एहसास और चीख की आवाज़ मुझे और मेरे दोस्त को साफ सुनाई दे रही थी। हम दोनों ने जिस एहसास को पाने के लिए उस कम बोलने वाले लड़के को मारा था। उस एहसास की प्राप्ति आज उस लड़की से हो रही थी।
पर हम दोनों जड़ हो कर खड़े थे।
और उस लड़की की आँखों का वह गहरा समंदर सूख चुका था और सारी रँगबिरँगी मछलियां दम तोड़ चुकी थीं।
मयंक अग्निहोत्री✍️

so nice story...manku
ReplyDeleteबहुत अच्छा जोड़े है 👌
ReplyDeleteशुरुआत में नायक भोला भाला लगा पर अंत आते आते उसने अपने और हम सबके अंदर छुपे हुए प्राणी से अवगत करा ही दिया।👌👌👌
ReplyDeleteवाह भइया😆😆
ReplyDelete