Saturday, September 17, 2022

घर वापसी/ Ghar Waapsi

हॉटस्टार पर एक वेबसीरिज आई है


 " घर वापसी  "



 


नी भिया मेको लगा कि निर्मल पाठक की घर वापसी देखने के बाद एक ये घर वापसी भी अपन निपटा लेते है।


कुल छह एपिसोड की इस वेबसीरिज का मुख्य पात्र शेखर उर्फ सनी ( विशाल वशिष्ठ ) बैंगलोर से अपने घर यानी कि इंदौर वापस आता है लगभग 2 साल बाद।   

सनी अपने घर से कई सालों से दूर रहा है। साथ ही वह बैंगलुरू के चकाचक माहौल और अपनी कॉरपोरेट जॉब में इतना घुलमिल गया है कि, उसे अपना घर ,अपना शहर, अपने लोग भी सही से याद नहीं है। ना ही उसे ये सब याद रखने में कोई खास दिलचस्पी अब हो रही है।

हर कॉरपोरेटिव कीड़े के नसीब में फायर्ड का मार्क होना ही होता है। ऐसा ही कुछ सनी के साथ होता है। उसे उसकी नौकरी से निकाल दिया जाता है बिना किसी ठोस एक्सप्लेनेशन के।

सनी अब तक बैंगलोर की लाइफ स्टाइल में रम चुका था। देखा देखी, कॉम्पटीशन कूट ज़िंदगी। उसने भी सभी की तरह कार ले रखी है, सिर पर दो ईएमआई का बोझ बराबर बना हुआ है और ऐसे में नौकरी से वह हाथ धो बैठता है। 

इसीलिए वह वहां से अपने घर भाग कर आ जाता है। प्लान करता है कि घर से ही नई नौकरी खोजेगा और बैंगलोर अपनी दुनिया वापस हो लेगा। 

भिया की इन्दोर वापसी ...

स्टेशन पर उसे लेने उसके बचपन का दोस्त दर्शन ( अजितेश गुप्ता ) और उसका छोटा भाई संजू ( साद बिलगामी ) आते हैं।
दर्शन और सनी की दोस्ती भाइयों टाइप दिखाई गई है।
परंतु इंटरेस्टिंग बात यह है कि सनी अपने 10 से 12 घण्टे की नौकरी में परिवार के साथ साथ दर्शन को भी भूल चुका है। पर दर्शन के लिए आज भी सनी उसका बचपन का दोस्त ही है। 

घर पर सनी का जोरदार स्वागत किया जाता है। होली दीवाली पर आने वाले बेटे, जो हर महीने तनख्वाह घर भेजते है। माँ बाप के लायक बच्चे वही होते हैं। जब उनके ये लायक बच्चे घर को लौटते हैं तब उनका स्वागत देखने योग्य होता है। सनी की माँ ( विभा छिब्बर ) अपने लाड़ले बेटे की सुविधा में कोई कसर नहीं छोड़ती जिसमें उन्हें सनी के पापा ( अतुल श्रीवास्तव ) का साथ बराबर मिलता है।

सनी ढाई साल बाद घर आया हुआ है। इंदौर इतने साल में बहुत कुछ बदल चुका है। उसके घर का पुराना सोफ़ा, पापा की टूर एंड ट्रेवेल की बंद होती दुकान , दुकान छोड़ कर उसके भाई संजू की कमल भिया के गेमिंग पार्लर में बने रहने की आदत, सनी की बहन सुरुचि और सनी के बीच की दूरी, मम्मी की बीपी की समस्या आदि आदि चीजें सनी को दिखाई देती हैं। 

सनी को उसके नौकरी से निकाले जाने की बात गुप्त रखनी है। उसने अभी तक किसी को नहीं बताया कि उसकी जॉब चली गई है। घर वालों के पूछने पर वह यही बतलाता है कि नौकरी बढ़िया चल रही है।


यह एक ऐसी सिचुएशन है जहाँ पर कोई भी राज बहुत दिनों तक राज नहीं रह सकता। एक दिन राज से पर्दा उठता है और घर के सभी लोगों का नज़रिया सनी के प्रति परिवर्तित हो जाता है। 

सत्ताईस साल का बेरोजगार युवक आख़िर कितने दिन अपनी बेरोजगारी की बात छिपा कर रख सकता है। पर सनी ने हार नहीं मानी है वह नौकरी की तलाश जारी रखता है इंटरव्यूज देता रहता है पर एक दिन घर मे कलेश होने की वजह से उसकी ड्रीम कम्पनी में उसके अच्छे परफॉर्मेंस के बाद भी फाइनल राउंड में वो इंटरव्यू नहीं दे पाता। 

सनी एक रेस्टोरेंट में चाय पीने जाया करता है। रेस्तरां के ऑनर मनीष भिया भी पूर्व कॉरपोरेटिव कीड़े रहे है। साथ ही अमरीका जाकर भी नौकरी कर आये हैं और अब रेस्तरां चला रहे हैं। सनी को यह बात समझ नहीं आई कि अमरीका में नौकरी करने वाला बन्दा इन्दोर आकर चाय क्यों बेचने लगा।

यह वेबसीरिज कॉरपोरेटिव कल्चर तथा आम आदमी फैमिली कल्चर की मिली जुली कहानी बयाँ करती है। पढ़ाई करने के बाद लोग महत्वकांक्षा से लब्ध अपनी प्रोग्रेसिव तथा अमीरी सोच लिए बड़े शहरों की ओर कूच कर जाते हैं। किसी कम्पनी में नौकरी करते हैं और अपना सम्पूर्ण जीवन अपनी कम्पनी के नाम कर देते हैं। दिन भर कम्प्यूटर स्क्रीन पर धंसे बैठे रहते हैं उस कम्पनी पर अपनी जवानी अपनी योग्यता अपना समय और अपनी सेहत कुर्बान कर रहे होते हैं जो किसी की भी सगी नहीं रह सकती। 


कुछ लोग पैदा ही होते हैं ऐसे कल्चर का पार्ट बनने के लिए। उन्हें इसमें मजा आता है। गलाकाट रेस में दौड़ने में, दिनरात काम के व्यस्त रहने में, वीकेंड में साथियों के साथ दारू पीने और उन्ही साथियों से मन ही मन वैमनस्य भाव रखने में कुछ लोगो को मजा आता है। क्योंकि उन्होंने ऐसे कल्चर को अडॉप्ट कर लिया होता है। या तो मजबूरी वश या स्वेच्छा से।

पर इंसान को जब यह पता चलने लगता है कि परिवार से बड़ा कुछ नहीं हैं। बचपन के दोस्त, भाई , बहन इन सभी से कट जाना। सनी और उसकी बहन हमेशा से क्लोज रहे हैं वे आपस की हर बात एक दूसरे से साझा करते रहे हैं पर अब सब बदल चुका है। और जब यह बदलाव समझ आने लगता है तब तक देर तो काफी हो चुकी होती है।

सनी का भाई संजू उसकी इज्जत नहीं करता क्योंकि बड़े भाई होने का फर्ज वह ढंग से निभा नहीं पाया। पापा सनी को कुछ नहीं बताते क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका लड़का व्यस्त है व्यस्त बना रहे जिससे उसकी तरक्की में बाधा ना हो। बहन सुरुचि ( अनुष्का कौशिक ) सनी से होली दीवाली वाले रिश्ते तक सीमित रहने कहती है क्योंकि जब उसे उसके बड़े भाई की जरूरत थी तब सनी उसके साथ नहीं था।

सनी की इसमें कोई गलती नजर नहीं आती। गहरे समंदर के अंदर जाने के बाद सर्वाइवल की चिंता बनी रहती है। ऐसे में अपनी देश दुनिया का ध्यान ना मात्र की रह जाता है।

 सनी मेहनती और योग्य एम्प्लॉयी तो है पर उसे समझ आता है कि उसे योग्य बेटा, भाई और दोस्त बनने की भी आवश्यकता है। 
बहुत सारे द्वंद से जूझते हुए कैसे वह निर्णय लेने में सफल होता है , जिसे लेने में कई लोग अपनी पूरी ज़िंदगी गुजार देते हैं। 
अंत मे वह वही करता है जिसमे उसके परिवार और उसकी अपनी खुशी निहित है। 

यह वेबसीरिज देखी जा सकती है। क्योंकि भारत का युवावर्ग, उसके मातापिता, बहन भाई यार दोस्त सब इससे खुद को रिलेट करेंगे। दूसरा इंदौर को अच्छा एक्सप्लोर किया गया है इसमें। ओल्ड पलासिया, गीता भवन, छप्पन आदि के रेफ़्रेंसेस खूब दिखाई देते हैं। पोहा जलेबी कचोरी के साथ साथ बोली की मिठास की झलक भी इस वेबसीरिज मे दिखाई देती है। 

इस समाज मे दर्शन जैसा दोस्त मिलना बेहद कठिन हो चला है। साथ ही दर्शन जैसा इन्सान बनना भी मुश्किल है। एक ऐसा दोस्त जो दोस्त के अच्छे और बुरे में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देता है। जो तमाम चकाचौंध से दोस्ती के रिश्ते को दूर रखता है। दोस्त के कई बार इग्नोर किये जाने पर भी वह दोस्ती नहीं तोड़ता बल्कि दोस्त को इस बात का एहसास कराता है कि वो उसे दोस्त समझे या भूल जाये उसके लिए वह उसका वही बचपन वाला भाई ही रहेगा।


अंतिम एपिसोड में दर्शन और सनी का गले मिलना भावुक कर जाता है। यह विडम्बना ही हो चली है कि लोग प्राथमिकताओं में पल प्रतिपल तुच्छ स्वार्थ के लिए बदलाव करते हैं, जिससे रिश्ते प्रभावित होते ही हैं। 

भरत मिसरा और तत्सत पाण्डेय के द्वारा लिखी गई कहानी और स्क्रीन प्ले ठीक लगता है, कॉन्सेप्ट कैची है। एक्टिंग भी अच्छी की गई है। कहीं कहीं से TVF ट्रिपलिंग वाली vibe आती है पर ठीक है। निर्देशक रुचिर अरुण का काम प्रभावित करता है पर वेबसीरिज या तो और छोटी हो सकती थी या थोड़ी एक्सप्लेनेशन और डिटेलिंग के साथ 8 एपिसोड तक जा सकती थी। 6 एपिसोड्स की वेबसीरिज कुछ कुछ चीजें कहकर ख़त्म हो जाती है। एडिटिंग बढ़िया की गई है। बैकग्राउंड स्कोर भी सुनने योग्य है। बाकी इंदौरी माहौल इसे और दिलचस्प बना देता है।

आप सभी डिज़्नी हॉटस्टार पर इसे एन्जॉय कर सकते हैं। with फैमिली। 


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~ मयंक अग्निहोत्री

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