Cinema Between Virtù & Fortuna

फ़िल्म मेकिंग एक ऐसी कला है जिसमें कई बड़े से बड़े मेकर्स को भी परिस्थितियों से समझौता करना पड़ सकता है। ये परिस्थितियाँ स्व-निर्मित हो सकती हैं, टीम के भीतर से पैदा हो सकती हैं या फिर प्रकृति द्वारा निर्मित। मेकर्स को उनसे या तो लड़ना पड़ता है, समझौता करना पड़ता है या कभी-कभी हार माननी पड़ती है। खासकर उन जगहों पर, जहाँ लोगों के अंदर प्रोफेशनलिज़्म नहीं होता या कम होता है, वहाँ एक मेकर को और अधिक सर्वाइव करना पड़ता है। कई बार पूरी टीम ही पेशेवर नहीं होती और गड़बड़ियों के बाद एक-दूसरे को दोष देने लगती है। यह सब सिनेमा मेकिंग का एक बड़ा हिस्सा है, खासकर इंडी फिल्म मेकिंग का। इसे वक्त रहते समझना बेहद आवश्यक है।

Machiavelli के लिए Fortuna केवल दुर्भाग्य नहीं है। यह उन परिस्थितियों का प्रतिनिधित्व करती है जो हमारे नियंत्रण से बाहर होती हैं और अचानक हमारे सामने आ खड़ी होती हैं। फ़िल्म मेकिंग में भी ऐसी परिस्थितियाँ लगातार आती रहती हैं। कभी मौसम, कभी लोकेशन, कभी उपकरण, कभी टीम और कभी हमारे अपने फैसले ही समस्या बन जाते हैं।

कई बार Fortuna आपके Virtù पर बड़े संकट लाद देता है। मेकर्स और पूरी टीम पैनिक करने लगती है। ऐसे समय में लोग Murphy’s Law को याद करने लगते हैं- “अगर कुछ गलत हो सकता है, तो वह गलत होगा ही।” लेकिन फिल्म मेकिंग में असली सवाल यह नहीं है कि क्या गलत होगा। असली सवाल यह है कि गलत होने के बाद मेकर क्या करता है।




यहीं बात आती है मेकर की प्रत्युत्पन्नमति की। इसे मैं Virtù की instinct कहना चाहूँगा। आपदा में अवसर तलाशने वाली बुद्धि का होना जरूरी है। क्योंकि फ़िल्म के सेट पर परिस्थितियाँ हमेशा आपके नियंत्रण में नहीं होंगी, लेकिन उन परिस्थितियों के प्रति आपका response आपके नियंत्रण में हो सकता है। आपके फैसलों पर निर्भर और भरोसा करती है आपकी लगातार की गई मेहनत, टीम का भरोसा, फ़ाइनेंस, समय और अंततः आपकी पहचान। इसलिए संकट की स्थिति में केवल पैनिक करना या एक-दूसरे को दोष देना किसी समाधान तक नहीं पहुँचाता।

मुझे लगता है आत्मालोचन, चिंतन और हिम्मत सबसे प्रमुख उपाय हैं जब काम गड़बड़ समझ आने लगे। अपनी गलती को स्वीकार करना, परिस्थिति को समझना और फिर उपलब्ध संसाधनों के भीतर कोई नया रास्ता तलाशना...शायद यही Virtù का सबसे व्यावहारिक रूप है। क्योंकि हिम्मत हारना कोई विकल्प नहीं है। There is no escape. काम करते रहना होगा, यदि बात जुनून की है। यदि जुनून नहीं है, तब बात अलग है।

इसलिए अपने Virtù पर भरोसा करना जरूरी है। Fortuna से घिरा तो यह पूरा संसार है ही। हम हर परिस्थिति को नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन हर परिस्थिति में अपने response को बेहतर करने की कोशिश जरूर कर सकते हैं। शायद एक फिल्ममेकर की असली परीक्षा इस बात में नहीं है कि उसकी फिल्म के निर्माण में कितनी समस्याएँ आईं, बल्कि इस बात में है कि उन समस्याओं के बीच उसने कितनी समझदारी, साहस और रचनात्मकता से रास्ता बनाया।

अंत में अल्फ़्रेड का वो डायलॉग याद आ रहा है, जो उसने ब्रूस वेन से कहा था-

“Why do we fall, sir? So that we can learn to pick ourselves up.”

- अग्निमय

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